Home एग्रीकल्चर एग्री बिजनेस प्याज के दाम फिर 80 रुपये के पार, खराब मौसम से फसल को नुकसान
प्याज के दाम फिर 80 रुपये के पार, खराब मौसम से फसल को नुकसान
प्याज के दाम फिर 80 रुपये के पार, खराब मौसम से फसल को नुकसान

प्याज के दाम फिर 80 रुपये के पार, खराब मौसम से फसल को नुकसान

प्याज के प्रमुख उत्पादक राज्यों महाराष्ट्र, कनार्टक तथा राजस्थान में बेमौसम बारिश से प्याज की फसल को नुकसान हुआ है जिस कारण इसकी कीमतों में फिर तेजी आई है। दिल्ली एनसीआर में प्याज की फुटकर कीमतें बढ़कर फिर से 75-80 रुपये प्रति किलो के पार हो गई है जबकि प्रमुख महाराष्ट्र की मंडियों में महीनेभर में ही इसकी कीमतों में 35 से 38 फीसदी की तेजी आ चुकी है।

दिल्ली की आजादपुर मंडी के प्याज के थोक कारोबारी उमेश अग्रवाल ने बताया कि उत्पादक राज्यों में मौसम खराब होने के कारण प्याज की फसल को नुकसान हो रहा है। लगातार हो रही बारिश से खेतों से प्याज की निकासी नहीं हो रही है, जिस कारण मंडी में दैनिक आवक नहीं बढ़ पा रही है। उन्होंने बताया कि मौसम साफ होने के बाद ही प्याज की आवक बढ़ेगी, तभी कीमतों में गिरावट आने का अनुमान है। आजादपुर मंडी में मंगलवार को प्याज के भाव 20 से 62.50 रुपये प्रति किलो हो गए।

उत्पादक मंडियों में कीमतों में आई तेजी, प्रतिकूल मौसम से फसल को नुकसान

राष्ट्रीय बागवानी अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान (एनएचआरडीएफ) के अनुसार महाराष्ट्र की पीपलगांव मंडी में मंगलवार को प्याज के भाव 21 से 53 रुपये प्रति किलो हो गए, जबकि 7 अक्टूबर को इसके भाव 19.51 से 39.12 रुपये प्रति किलो थे। इसी तरह से लासलगांव में इस दौरान उच्च क्वालिटी के प्याज के भाव 38.25 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 53 रुपये प्रति किलो हो गए। पुणे मंडी में प्याज के भाव उंचे में मंगलवार को 52.50 रुपये प्रति किलो हो गए। लासलगांव की कृषि उपज विपणन समिति (एपीएमसी) के के एक अधिकारी ने बताया कि अक्टूबर में कर्नाटक और महाराष्ट्र में सामान्य से ज्यादा बारिश हुई, जबकि नवंबर में भी इन राज्यों में बारिश हो रही है जिससे प्याज की फसल को नुकसान हुआ है।

उत्पादक राज्यों में नवंबर में सामान्य से ज्यादा हो रही है बारिश

भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के अनुसार पिछले 24 घंटों के दौरान महाराष्ट्र में सामान्य से 157 फीसदी ज्यादा बारिश हुई है जबकि पहली नवंबर से पांच नवंबर तक राज्य में सामान्य से 143 फीसदी, कर्नाटक में 99 फीसदी, गुजरात में 242 फीसदी और राजस्थान में इस दौरान 134 फीसदी अधिक बारिश दर्ज की गई।