Home एग्रीकल्चर एग्री बिजनेस राजस्थान में बारिश की कमी से निपटने के लिए आकस्मिक प्लान तैयार करने के निर्देश
राजस्थान में बारिश की कमी से निपटने के लिए आकस्मिक प्लान तैयार करने के निर्देश
राजस्थान में बारिश की कमी से निपटने के लिए आकस्मिक प्लान तैयार करने के निर्देश

राजस्थान में बारिश की कमी से निपटने के लिए आकस्मिक प्लान तैयार करने के निर्देश

राजस्थान में चालू सीजन में मानसूनी बारिश सामान्य से कम होने के कारण सरकार ने कृषि अधिकारियों को आकस्मिक प्लान तैयार करने के निर्देश दिए हैं। पहली जून से 23 जुलाई तक पश्चिम राजस्थान में बारिश सामान्य से 44 फीसदी कम दर्ज की गई है।

राज्य के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने की उच्चस्तरीय बैठक में अधिकरियों को निर्देश दिए की पेयजल संकट और अकाल की स्थिति से निपटने के लिए आकस्मिक प्लान तैयार करे। मौसम विभाग के अनुसार राज्य के पश्चिम हिस्से में पहली जून से 23 जुलाई तक केवल 63.4 मिलीमिटर बारिश ही हुई है जबकि सामान्यत: इस दौरान 112.4 मिलीमिटर बारिश होती है। बैठक में गहलोत ने सभी विभागों के अधिकारियों को आकस्मिक इंतजाम की पूर्व तैयारी रखने और पेयजल तथा पशुधन के चारे के लिए कंटीन्जेसी प्लान तैयार रखने के निर्देश दिए हैं।

राज्य में 27 जुलाई से एक अगस्त तक अच्छी बारिश की उम्मीद

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस संबंध में आवश्यक प्रक्रियाएं और वित्तीय स्वीकृति समय रहते ही पूरी कर ली जाए। बैठक में मुख्यमंत्री ने पेयजल आपूर्ति जलाशयों में पानी की उपलब्धता के साथ ही खरीफ फसलों की बुआई की स्थिति की समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव आपदा प्रबंधन सहित विभिन्न विभाग और जिला कलेक्टरों के साथ चर्चा की। बैठक में मौसम विभाग की ओर से मुख्यमंत्री को अवगत कराया गया है कि 27 जुलाई से 1 अगस्त के बीच प्रदेश भर में अच्छी बारिश होने की संभावना है जिससे राज्य में खरीफ की फसलों की बुआई में तेजी आयेगी, साथ ही पेयजल और सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता भी बढ़ सकेगी।

किसानों को कम समय में तैयार होने वाली फसलों की बुआई की सलाह

कृषि विभाग के अधिकारियों को किसानों को कम समय में तैयार होने वाली फसल की बुवाई करने और हरे चारे वाली फसलों की बुवाई करने के लिए प्रेरित करने को कहा। बैठक में जल विभाग की ओर से मुख्यमंत्री को अवगत कराया है कि गया कि बीते दिनों प्रदेश के कई हिस्सों में हुई बरसात के बाद से टैंकरों से पेयजल आपूर्ति की आवश्यकता में कमी आई है।