Home एग्रीकल्चर एग्री बिजनेस बकाया भुगतान के लिए केंद्र सरकार ने चीनी मिलों को 10,540 करोड़ रुपये के सॉफ्ट लोन को दी मंजूरी
बकाया भुगतान के लिए केंद्र सरकार ने चीनी मिलों को 10,540 करोड़ रुपये के सॉफ्ट लोन को दी मंजूरी
बकाया भुगतान के लिए केंद्र सरकार ने चीनी मिलों को 10,540 करोड़ रुपये के सॉफ्ट लोन को दी मंजूरी

बकाया भुगतान के लिए केंद्र सरकार ने चीनी मिलों को 10,540 करोड़ रुपये के सॉफ्ट लोन को दी मंजूरी

किसानों के बढ़ते बकाया भुगतान में तेजी लाने के लिए केंद्र सरकार ने चीनी मिलों को 10,540 करोड़ रुपये का सस्ता कर्ज देने की घोषणा की है। इसमें शर्त यह है कि जिन चीनी मिलों ने किसानों का 25 फीसदी गन्ने का बकाया भुगतान कर दिया है, उन्हें ही इसका फायदा मिलेगा।

पहली अक्टूबर से शुरू हुए चालू गन्ना पेराई सीजन 2018-19 (अक्टूबर से सितंबर) के फरवरी के आखिरी सप्ताह तक चीनी मिलों पर किसानों के बकाया की रकम बढ़कर 20,000 करोड़ रुपये को पार कर गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) की बैठक में इसको मंजूरी दी गई।

पच्चीस फीसदी भुगतान कर चुकी मिलों को मिलेगा सस्ता कर्ज

सीसीईए की बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि किसानों के बकाया भुगतान में तेजी लाने के लिए चीनी मिलों को सॉफ्ट लोन देने के लिए 10,540 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है। उन्होंने बताया कि उन्हीं चीनी मिलों को इसका लाभ मिलेगा, जो चालू पेराई सीजन 2018-19 में किसानों को 25 फीसदी का भुगतान कर चुकी होंगी।

उद्योग के अनुसार चीनी उत्पादन अनुमाम कम

केंद्र सरकार ने हाल ही में चीनी उद्योग के राहत देने के लिए चीनी के न्यूनतम बिक्री भाव (एमएसपी) को दो रुपये प्रति किलो बढ़ाकर 31 रुपये किलो कर दिया था। इससे चीनी मिलों को बड़ी राहत मिली थी। उद्योग के अनुसार चालू गन्ना पेराई सीजन 2018-19 में चीनी का उत्पादन घटकर 307 लाख टन ही होने का अनुमान है जबकि पिछले साल रिकार्ड 325 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ था। देश में चीनी की सालाना खपत करीब 250 से 255 लाख टन की ही होती है। पहली अक्टूबर 2018 को शुरू हुए चालू गन्ना पेराई सीजन के समय चीनी मिलों के पास करीब 100 लाख टन से ज्यादा चीनी का बकाया स्टॉक बचा हुआ था।

इससे पहले भी चीनी मिलों को दी गई है राहत

इससे पहले भी केंद्र सरकार चीनी मिलों को कई तरह की राहत दे चुकी है। जून 2018 में केंद्र सरकार ने चीनी मिलों को 8,500 करोड़ रुपये का पैकेज देने की घोषणा की थी, इसमें 4,440 करोड़ रुपये चीनी मिलों को सस्ते कर्ज के रूप में एथेनॉल क्षमता के विकास के लिए दिए गए थे। उधर सितंबर 2018 में मिलों को राहत देने के लिए केंद्र सरकार ने एथेनॉल की कीमतों में भी बढ़ोतरी की थी। सीधे गन्ने के रस से बनने वाले एथेनॉल का भाव बढ़ाकर 59.19 रुपये प्रति लीटर तय किया था, जबकि बी-ग्रेड एथेनॉल का भाव 47.13 रुपये से बढ़ाकर 52.43 रुपये प्रति लीटर कर दिया था।