Home एग्रीकल्चर एग्री बिजनेस लॉकडाउन : गेहूं किसानों के हितों को देखते हुए सरकार ने खाद्यान्न के पैकेजिंग नियमों में दी ढील
लॉकडाउन : गेहूं किसानों के हितों को देखते हुए सरकार ने खाद्यान्न के पैकेजिंग नियमों में दी ढील
लॉकडाउन : गेहूं किसानों के हितों को देखते हुए सरकार ने खाद्यान्न के पैकेजिंग नियमों में दी ढील

लॉकडाउन : गेहूं किसानों के हितों को देखते हुए सरकार ने खाद्यान्न के पैकेजिंग नियमों में दी ढील

कोरोना वायरस के कारण देशभर में 21 दिनों के लॉकडाउन के कारण जूट मिलें बंद है जबकि गेहूं की फसल की कटाई जोरों पर है इसलिए केंद्र सरकार ने खाद्यान्न पैकजिंग के पैकेजिंग नियमों में ढील देते हुए किसानों को गेहूं की पैकेजिंग के लिए पॉलिमर सामग्री से बने बोरों के इस्तेमाल की अनुमति दी है।

कपड़ा मंत्रालय के अनुसार इस कदम का मकसद गेहूं किसानों के हितों की रक्षा करना है क्योंकि अप्रैल के मध्य तक गेहूं की फसल कटकर तैयार होने की संभावना है। मंत्रालय के अनुसार लॉकडाउन की अवधि समाप्त होने के बाद जैसे ही जूट मिलों में जूट बोरों का उत्पादन शुरू हो जायेगा, तो खाद्यान्न की पैकेजिंग के लिए जूट के बोरों को ही प्राथमिकता दी जाएगी। मंत्रालय के अनुसार उच्च घनत्व वाली पॉलीथीन या पॉलीप्रोपाइलीन (एचडीपीपी/पीपी) की सीमा को पहले के 1.80 लाख गांठों से बढ़ाकर 2.62 लाख गांठ बैग कर दिया गया है। लॉकडाउन के कारण गेहूं किसानों को वैकल्पिक पैकेजिंग की उपलब्धता के कारण ऐसा किया गया है।

रबी फसलों की पैकेजिंग के लिए भारी मात्रा में बोरियों की जरुरत पड़ेगी

केंद्र सरकार ने खाद्यान्न की 100 फीसदी पैकेजिंग के लिए जूट बैग को अनिवार्य कर रखा है। अनाज की पैकेजिंग मुख्य रूप से जूट पैकेजिंग सामग्री अधिनियम (जीपीएम) 1987 के तहत जूट की बोरियों में ही की जाती है। यह कदम इसलिए उठाया गया है कि रबी फसलों की कटाई को देखते हुए भारी मात्रा में खाद्यान्न की पैकेजिंग के लिए बोरों की आवश्यकता है जबकि कोरोना वायरस के कारण देशभर में लॉकडाउन चल रहा है जिस कारण जूट मिलें जूट बोरियों का उत्पादन नहीं कर पा रही है इसलिए गेहूं किसानों को परेशानी से बचने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की गई है।   

एफसीआई ने सरकार से वैकल्पिक उपाय की अनुमति मांगी थी

मंत्रालय ने सभी जूट उगाने वाली राज्य सरकारों को जूट के उत्पादों के साथ ही इनकी आवाजाही, बिक्री और आपूर्ति को भी अनुमति देने के लिए लिखा है, ताकि लॉकडाउन अवधि के दौरान किसानों की मदद की जा सके। भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) जोकि सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के लिए राज्य सरकारों की खरीद एजेंसियों के साथ मिलकर खाद्यान्न की खरीद करती है ने सरकार को लिखा था कि लॉकडाउन के कारण जूट मिलें जरुरत के हिसाब से बोरे तैयार करने में असमर्थ हैं, इसलिए सरकार मुसीबत के समय में हस्तक्षेप कर वैकल्पिक उपाय की अनुमति दे।

एजेंसी इनपुट