Home एग्रीकल्चर एग्री बिजनेस किसान पराली को जलाने के बजाए आमदनी का जरिया बनाए : पुरुषोत्तम रूपाला
किसान पराली को जलाने के बजाए आमदनी का जरिया बनाए : पुरुषोत्तम रूपाला
किसान पराली को जलाने के बजाए आमदनी का जरिया बनाए : पुरुषोत्तम रूपाला

किसान पराली को जलाने के बजाए आमदनी का जरिया बनाए : पुरुषोत्तम रूपाला

पराली जलाने से पर्यावरण को तो नुकसान होता ही है, साथ ही इससे खेत को भी नुकसान होता है इसलिए किसान पराली जलाने के बजाए, इसे आमदनी का जरिया बनाएं। कृषि राज्य मंत्री पुरुषोत्तम रूपाला ने दिल्ली में आयोजित पराली प्रबंधन पर राष्ट्रीय किसान सम्मेलन में कहा कि पराली प्रबंधन के लिए तकनीक का इस्तेमाल करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि पराली प्रबंधन के लिए केंद्र सरकार द्वारा दी जा रही सुविधाओं, मसलन कस्टम हायरिंग सेंटर से छोटे किसान भी लाभ उठा सकते हैं। उन्होंने पराली प्रबंधन के लिए किसानों के साथ ही कृषि वैज्ञानिक और राज्य कृषि विश्वविद्यालयों के अधिकारियों की सराहना की। उन्होंने अधिकारियों से किसानों के अनुभवों को फिल्म के माध्यम किसानों तक पहुंचाने पर जोर दिया, ताकि किसान इसके प्रति जागरूक हो सके। उन्होंने बताया कि किसानों के सुझाव के आधार पर केंद्र सरकार पराली प्रबंधन पर और जोर देगी।

पराली जलाने से पर्यावरण के साथ-साथ मिट्टी की उर्वरक क्षमता में कमी

उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रातप शाही ने पराली जलाने के नुकसान, पराली प्रबंधन के उपयोग, इसके लाभ और सरकार द्वारा किसानों को दी जा रही सब्सिडी के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के सहयोग के फलस्वरूप पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और दिल्ली में पराली जलाने के मामलों में भारी गिरावट आई है। उन्होंने कहा कि पराली जलाने से न केवल पर्यावरण को खतरा है बल्कि मानवीय स्वास्थ्य के साथ-साथ मिट्टी की उर्वरक क्षमता में भी कमी होती है। उन्होंने आंकड़ों और तथ्यों का हवाला देते हुए पराली प्रबंधन के मामले में उत्तर-प्रदेश सरकार द्वारा उठाए गए प्रशंसनीय कदमों का जिक्र किया और किसानों से संकल्प लेने का आग्रह करते हुए कहा कि फसल अवशेष प्रबंधन किसानों की आय में वृद्धि कर सकता है।

जनता और निजी प्रयासों से इस तरह की चुनोतियों से निपटना कारगर

कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (डीएआरई) के सचिव और आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. त्रिलोचन महापात्रा ने कहा कि जनता और निजी प्रयासों के जरिए इस तरह की चुनौतियों का कारगर तरीके से मुकाबला किया जा सकता है। कृषि मशीनीकरण को प्रोत्साहन और पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश तथा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में पराली प्रबंधन संबंधी केन्द्रीय योजना के तहत धान की पराली को जलाने की घटनाओं में 2017 की तुलना में 15 फीसदी और 2016 की तुलना में 41 फीसदी की कमी आई है। उन्होंने बताया कि 2018 में हरियाणा और पंजाब के 4,500 से अधिक गांव पराली जलाने से मुक्त घोषित किए गए हैं। इस दौरान इन गांवों में पराली जलाने की एक भी घटना नहीं हुई है।