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ई-नाम किसानों के लिए
ई-नाम किसानों के लिए "वन नेशन, वन मार्केट" के सपने को कर रहा है साकार

ई-नाम किसानों के लिए "वन नेशन, वन मार्केट" के सपने को कर रहा है साकार

अखिल भारतीय व्यापार पोर्टल राष्ट्रीय कृषि बाजार (ई-नाम) किसानों के लिए "वन नेशन, वन मार्केट" के सपने को साकार करने में मदद कर रहा है। इससे 16 राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों की 585 मंडियों को पहले ही जुड़ा जा चुका हैं। इसके अतिरिक्त 415 मंडियों को भी ई-नाम से जल्द ही जोड़ा जाएगा, जिससे इस पोर्टल पर मंडियों की कुल संख्या एक हजार हो जाएगी।

यह सरकार के 2022 तक किसानों की आय दोगुना करने के लक्ष्य का ही हिस्सा है। ई-नाम एक राष्ट्रव्यापी इलेक्ट्रॉनिक व्यापार मंच है जो देश की सभी कृषि उपज मंडियों को आपस में जोड़ता है। इससे किसानों को देशभर की कृषि मंडियों में कृषि जिंसों का भाव पता चलता है। इसका मकसद किसानों की बाजार तक बेहतर पहुंच उपलब्ध कराने में मदद करना है।

कीमतों में सुधार के साथ ही व्यापार के लेन देन में पारदर्शिता लाता है

ई-नाम को चार वर्ष हो गए हैं, इस अवसर पर केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि ई-नाम कृषि विपणन में एक अभिनव पहल है, जो किसानों की डिजिटल पहुंच को कई बाजारों और खरीदारों तक डिजिटल रूप से पहुंचाता है और कीमतों में सुधार के साथ ही व्यापार के लेन देन में पारदर्शिता लाता है। इसके माध्यम से किसानों के लिए एग्री जिंसों की बिक्री को आसान बनाने की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए, 14 अप्रैल 2016 को 21 मंडियों में प्रधानमंत्री द्वारा ई-नाम को लॉन्च किया गया था, जो अब 16 राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों में 585 मंडियों तक पहुच गया है। उन्होंने कहा इसमें 415 मंडियों को और जल्द ही जोड़ा जायेगा, जिससे मंडियों की कुल संख्या बढ़कर 1,000 तक हो जायेगी। उन्होंने कहा कि यह ऑनलाइन प्लेटफॉर्म भारत में कृषि बाजार में सुधार के लिए एक विशाल छलांग साबित होगा।

ई-नाम पर 1.66 करोड़ से अधिक किसान और 1.28 लाख व्यापारी जुड़ चुके हैं

उन्होंने कहा कि हमारे पास 1.66 करोड़ से अधिक किसान और 1.28 लाख व्यापारी ई-नाम प्लेटफॉर्म पर पंजीकृत हैं। किसान ई-नाम पोर्टल पर पंजीकरण करने के लिए स्वतंत्र हैं और वे सभी ई-नाम मंडियों में व्यापारियों को ऑनलाइन बिक्री के लिए अपनी उपज अपलोड कर रहे हैं और व्यापारी किसी भी स्थान से ई-नाम पर बिक्री के लिए उपलब्ध लॉट के लिए बोली लगा सकते हैं।

इसका उद्देश्य किसान को लाभ पहुंचाना है और कृषि उत्पाद बेचने के तरीके को बदलना है

इस अवसर पर केंद्रीय कृषि सचिव संजय अग्रवाल ने बताया कि ई-नाम केवल एक योजना नहीं है, बल्कि यह एक यात्रा है जिसका उद्देश्य किसान को लाभ पहुंचाना है और उनके कृषि उत्पाद बेचने के तरीके को बदलना है। इससे किसानों को देशभर की कृषि मंडियों में कृषि जिंसों का भाव पता चलता है। इसका मकसद किसानों की बाजार तक बेहतर पहुंच उपलब्ध कराने में मदद करना है। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन और पारदर्शी बोली प्रणाली किसानों को ई-नाम प्लेटफॉर्म पर व्यापार करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। शुरुआत में 25 एग्री जिसों के साथ शुरू किया गया था, जबकि इस समय 150 एग्री उत्पादों में ई-व्यापार की सुविधा प्रदान की गई थी। ई-नाम मंडियों में गुणवत्ता परख परीक्षण सुविधाएं प्रदान की जा रही है।