Home एग्रीकल्चर एग्री बिजनेस गन्ने की फसल का ब्यौरा पोर्टल पर डालने संबंधी मुख्यमंत्री के ट्वीट पर बिफरे किसान
गन्ने की फसल का ब्यौरा पोर्टल पर डालने संबंधी मुख्यमंत्री के ट्वीट पर बिफरे किसान
गन्ने की फसल का ब्यौरा पोर्टल पर डालने संबंधी मुख्यमंत्री के ट्वीट पर बिफरे किसान

गन्ने की फसल का ब्यौरा पोर्टल पर डालने संबंधी मुख्यमंत्री के ट्वीट पर बिफरे किसान

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने शुक्रवार की शाम ट्वीट कर किसानों को गन्ने की पैदावार से संबंधित पूरा डाटा चार दिन के भीतर 'मेरी फसल-मेरा ब्यौरा’ पर डालने की अपील किए जाने के बाद किसान संगठन सरकार के खिलाफ बिफर गए हैं।

किसानों ने एक बार फिर सरकार के विरूद्ध मोर्चा खोलते हुए सरकार से यह आदेश वापस लेने की मांग की है। वहीं इस ट्वीट के बाद मुख्यमंत्री विपक्ष के निशाने पर भी आ गए है। सरकार के इस फैसले का विरोध करते हुए भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि किसानों द्वारा इससे पहले सरसों का पूरा ब्यौरा पोर्टल पर डाला गया था और इसके बावजूद सरकार ने खरीद नहीं की। उन्होंने बताया कि किसानों ने जब प्रदर्शन किया तब सरकार की नींद टूटी और खरीद शुरू हुई।

31 जुलाई तक कराना होगा रजिस्ट्रेशन

चढूनी ने कहा कि किसानों को गन्ने का ब्यौरा पोर्टल पर डालने के लिए बहुत कम समय दिया गया है और इसे बढ़ाना जरूरी है क्योंकि ज्यादातर किसानों के पास इंटरनेट आदि की सुविधा नहीं है और जहां चीनी मिलें चल रही हैं वहां भी इंटरनेट की उचित व्यवस्था नहीं है। हरियाण सरकार ने गन्ने की फसल का 'मेरी फसल मेरा ब्यौरा’ पोर्टल पर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करवाने का निर्णय लिया है। गन्ना उत्पादक किसानों को 31 जुलाई तक हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड द्वारा स्थापित पोर्टल www.fasalhry.in पर अपनी गन्ने की फसल का ब्यौरा अपलोड करवाने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार ने इन आदेशों में साफ किया है कि अगले सीजन में चीनी मिलों द्वारा उन्हीं किसानों का गन्ना खरीदा जाएगा जिन्होंने 'मेरी फसल मेरा ब्यौरा’ पोर्टल पर अपनी फसल का रजिस्ट्रेशन करवाया है।

कांग्रेस का आरोप किसान विरोधी है राज्य सरकार

इसके पीछे सरकार का तर्क है कि भविष्य में चीनी मिलों द्वारा गन्ने की खरीद, भुगतान व अन्य संबंधित कार्य इस पोर्टल के माध्यम से ही किये जाएंगे जिससे चीनी मिलों के कार्यों में पारदर्शिता आएगी। इस बारे में कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सिंह सूरजेवला ने कहा कि यह सरकार शुरू से ही किसान विरोधी रही है और किसानों को स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के तहत उनकी फसल के दाम देने का झूठा जुमला छोड़कर सत्ता में आई भाजपा अब बहुराष्ट्रीय कंपनियों के हाथों में खेल रही है। कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि किसानो के हित में सरकार को अपने फैसले पर दोबारा विचार करना चाहिए।