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कृषि-रसायन उद्योग ने नए कीटनाशक प्रबंधन विधेयक में दंड के प्रावधानों का किया विरोध
कृषि-रसायन उद्योग ने नए कीटनाशक प्रबंधन विधेयक में दंड के प्रावधानों का किया विरोध

कृषि-रसायन उद्योग ने नए कीटनाशक प्रबंधन विधेयक में दंड के प्रावधानों का किया विरोध

कृषि-रसायन उद्योग ने नए कीटनाशक प्रबंधन विधेयक 2020 में दंड के प्रावधानों का विरोध करते हुए है कि इसमें छोटे और बड़े अपराधों के बीच अंतर नहीं है। क्रॉप केयर फेडरेशन ऑफ इंडिया (सीसीएफटी) ने कहा कि कीटनाशकों की कीमतों को नियंत्रित नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि ये आवश्यक वस्तुओं की श्रेणी में नहीं आती हैं।

पिछले महीने, कीटनाशक प्रबंधन विधेयक 2020 के मसौदे को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में मंजूरी दी थी। जिसमें किसानों के हित में कीटनाशक का सुरक्षित एवं प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने की पहल की गई। इसे जल्द ही संसद में पेश किया जाएगा। इसके अंतर्गत किसानों को हानिकारक कृषि रसायनों के उपयोग से नुकसान के मामले में मुआवजा देने का प्रावधान किया गया है। विधेयक का मुख्य उद्देश्य किसानों के हितों की रक्षा करना है।

बिल में हितधारकों के साथ गहन समीक्षा की आवश्यकता

सीसीएफटी ने कहा कि नए कानून के मसौदे में काफी बदलाव हैं इसलिए, इस बिल में हितधारकों के साथ गहन समीक्षा की आवश्यकता है। सीसीएफटी ने मांग की है कि परामर्श के लिए विधेयक को संसद की प्रवर समिति को भेजा जाना चाहिए। सीसीएफटी के अनुसार नए कीटनाशक प्रबंधन विधेयक 2020 में छोटे और बड़े अपराधों के मामले में ज्यादा अंतर नहीं है, जोकि व्यवसाय के संचालन के अपराधीकरण को बढ़ावा देगा। विधेयक के अनुसार अपराध करने पर पांच साल की जेल या फिर 50 लाख रुपये का जुर्माना या फिर दोनों का प्रावधान है।

बिल का उद्देश्य व्यवसाय संचालन के अपराधीकरण को कम करना

सीसीएफआई के वरिष्ठ सलाहकार, हरीश मेहता ने कहा कि वास्तविक निर्माता के लिए कोई सुरक्षा प्रावधान नहीं है, जो पंजीकरण समिति जैसी सक्षम संस्था द्वारा बनाए गए नियामक ढांचे के अनुसार निर्मित उत्पाद को लागू करता है। उन्होंने कहा कि कोई भी छोटे अपराध के लिए कारावास का जोखिम नहीं उठाएगा। उन्होंने कहा कि बिल का उद्देश्य व्यवसाय संचालन के अपराधीकरण को कम करना है।

एग्रो केमिकल्स आवश्यक वस्तुओं की श्रेणी में नहीं आता

सीसीएफआई ने कहा कि एग्रो केमिकल्स आवश्यक वस्तुओं की श्रेणी में नहीं आता है इसलिए इन उत्पादों को मूल्य नियंत्रण में लाने और सिस्टम में नई जटिलताएं पैदा करने कोई जरुरत नहीं है। उन्होंने कहा कि यह अनावश्यक रूप से एक प्रतिस्पर्धी बाजार में फसल सुरक्षा समाधानों की कीमत को नियंत्रित करने के किसी भी प्रयास से उन लोगों को डरा देगा जो एक अक्षम या कम प्रभावी विकल्पों की तुलना में फसल सुरक्षा के लिए बेहतर समाधान प्रदान करने के इच्छुक हैं।