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स्मृति उपवन में शपथ ग्रहणः एक और इतिहास रचने को अग्रसर भाजपा

उत्तर प्रदेश चुनावों में चौंकाने वाले परिणाम लाने वाली और मुख्यमंत्री के नाम की घोषणा में भी अब तक इसी तरह का संदेश देने वाली भारतीय जनता पार्टी ने शपथ ग्रहण स्‍थल को ले कर भी कुछ इसी तरह का निर्णय लिया है। रविवार, 19 मार्च को प्रस्तावित सूबे की नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह परंपरा से हट कर लखनऊ के स्मृतिउपवन में होने जा रहा है। अटकल तो यह भी लगाई जा रही कि तारीख 19 रखना भी कहीं न कहीं 2019 की फतेह का संकेत है।
स्मृति उपवन में शपथ ग्रहणः एक और इतिहास रचने को अग्रसर भाजपा

        अपने आदर्श राम की ही तरह करीब चौदह वर्ष के वनवास के बाद कथित रामभक्तों की यह भगवा सरकार, किंवदंतियों के अनुसार प्राथमिक रूप से उनके अनुज लक्ष्मण की बसाई और अवध के नवाबों की प्रिय नगरी लखनऊ की गद्दी पर आरूढ़ होने से पूर्व दलितों के तीर्थ स्वरूप निर्मित इस स्मृति उपवन / मैदान में शपथ ले कर एक और इतिहास रचने की ओर अग्रसर है। इसका निर्माण पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने 2007 में करवाया था। स्मृति उपवन में होने वाला यह पहला शपथ ग्रहण समारोह होगा, अभी तक यहां किसी भी मुख्यमंत्री ने शपथ नहीं ली है। उपवन से जुड़े मैदान में लखनऊमहोत्सव  का आयोजन होता है।

    दिलचस्प यह है कि चुनावों में भाजपा की अप्रत्याशित जीत से ‘बहनजी’ की बहुजन समाज पार्टी का वोट बैंक तो प्रभावित हुआ ही  है, अब बीजेपी अपनी आसन्न सरकार का शपथ ग्रहण समारोह मायावती के बनाये हुए स्मृति उपवन में करके उन वोटरों को कुछ और संदेश देने जा रही है।

   प्राप्त जानकारी के अनुसार रमाबाई अंबेडकर ग्राउंड के बाद यह सूबे की राजधानी का दूसरे नंबर का सबसे बड़ा मैदान है। इसकी क्षमता करीब तीन लाख लोगों की है। यहां दो मंच बनाने की तैयारी हो रही है। फिलहाल, जहां एक मंच पर प्रधानमंत्री के बैठने की योजना है, वहीं दूसरे मंच पर राज्यपाल और शपथ लेने वाले संभावित मुख्यमंत्री और मंत्री बैठेंगे।

   इससे पहले 2012 में अखिलेश यादव ने अपनी, मुख्यमंत्री पद की शपथ लामार्टीनियर ग्राउंड में ली थी, जब कि इस स्मृति मैदान का मुख्यमंत्री के रूप में निर्माण कराने वाली मायावती ने 2007 में जब वजीरे-सूबा का ताज हासिल किया था तो उन्होंने पद और गोपनीयता की शपथ राजभवन में ली थी।

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