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जेटली ने गोवा जनादेश हरण करने के कांग्रेस के आरोप को खारिज किया

MAR 14 , 2017
कांग्रेस के इस आरोप को कि भाजपा गोवा में जनादेश हरण की कोशिश कर रही है, को खारिज करते हुए वित्त मंत्री अरूण जेटली ने मंगलवार को कहा कि यह कुछ ज्यादा है क्योंकि राज्यपाल 17 विधायकों के अल्पमत को सरकार गठन के लिए निमंत्रित नहीं कर सकती थीं।

उन्होंने फेसबुक पोस्ट में लिखा, कांग्रेस पार्टी कुछ ज्यादा ही शिकायत करती है। उसने भारतीय जनता पार्टी पर गोवा में जनादेश हरण करने का आरोप लगाया। वह उच्चतम न्यायालय में अर्जी लगाकर विफल रही। उसने लोकसभा में मुद्दा उठाया।

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उन्होंने कहा कि मनोहर पर्रिकर की अगुवाई में 21 विधायकों के दावे के मद्देनजर राज्यपाल 17 विधायकों के अल्पमत को सरकार गठन के लिए निमंत्रित नहीं कर सकती थीं। उन्होंने कहा, राज्यपाल के इस फैसले के समर्थन में कई दृष्टांत हैं।

गोवा में हाल के विधानसभा चुनाव में 40 सदस्यीय सदन में भाजपा ने 13 सीटें जीती हैं जबकि कांग्रेस ने 17 सीटें। हालांकि भाजपा ने आठ अन्य विधायकों के समर्थन के आधार पर सरकार बनाने का दावा किया है।

पर्रिकर ने राज्यपाल मृदुला सिन्हा के सामने 21 विधायकों के समर्थन का पत्र पेश किया था जिसके बाद उन्होंने उन्हें सरकार गठन का न्यौता दिया था।

उच्चतम न्यायालय ने पर्रिकर के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथग्रहण समारोह पर रोक लगाने से इनकार कर दिया और 16 मार्च को सदन में शक्ति परीक्षण का आदेश दिया।

राज्यपाल पर पक्षपातपूर्ण तरीके से काम करने का आरोप लगाते हुए कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने संवाददाताओं से कहा, दो राज्यों, जहां हम चुनाव जीते, में लोकतंत्र को उन्होंने बाहुबल एवं धनबल के आधार पर धत्ता बता दिया। यही हो रहा है। गोवा एवं मणिपुर में जनादेश को भाजपा ने हरण कर लिया।

जेटली ने यह कहते हुए जवाब दिया कि गोवा की राज्यपाल के पास 40 निर्वाचित विधायकों में से 21 विधायकों का ही बस एक दावा था जबकि 17 विधायकों ने न तो दावा किया और न ही अपने नेता का चुनाव। इन 21 विधायकों के नेता मनोहर पर्रिकर हैं।

उन्होंने सवाल किया, कैसे कांग्रेस को सरकार बनाने के लिए निमंत्रित किया जा सकता है? जेटली ने कहा कि बिना बहुमत वाले सबसे बड़े दल बनाम बहुमत से लैस दलों के गठबंधन की बहस का जवाब मार्च 1988 में तत्कालीन राष्‍ट्रपति के आर नारायणन ने दे दिया था जब उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी को सरकार गठन का न्यौता दिया था।

भाजपा नेता ने लिखा, राष्‍ट्रपति ने कहा था कि जब किसी भी दल या दलों के चुनाव पूर्व गठबंधन को बहुमत नहीं हो तब भारत में या अन्यत्र राष्‍ट्राध्यक्ष ने उस दल या दलों के गठबंधन को पहला मौका दिया है जिसने सबसे अधिक सीटें जीती हो लेकिन इस तरह नियुक्त प्रधानमंत्री को दिये गये समयावधि के अंदर सदन का बहुमत हासिल करना होगा।

जेटली ने कहा, हालांकि यह प्रक्रिया सर्वकालिक उपाय नहीं है क्योंकि ऐसी स्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं जहां सबसे बड़े दल या गठबंधन के बाहर सांसद सामूहिक निकाय के रूप में सबसे बड़े दावेदार से संख्या में अधिक हों। राष्‍ट्रपति द्वारा प्रधानमंत्री का चयन का आधार होने वाले प्रधानमंत्री का बहुमत होने का दावा है।

गोवा की राज्यपाल के समर्थन में कई दृष्टांतों का हवाला देते हुए जेटली ने कहा कि वर्ष 2005 में भाजपा ने झारखंड में 81 में से 30 सीटें जीती थीं लेकिन अपनी पार्टी के 17 और अन्य के समर्थन रखने का दावा करने वाले झामुमो नेता शिबू सोरेन को सरकार बनाने का न्यौता दिया गया था।

जेटली ने कहा कि इसी तरह वर्ष 2002 में जम्मू कश्मीर में नेशनल कांफ्रेंस ने 28 सीटें जीती थीं लेकिन राज्यपाल ने पीडीपी और कांग्रेस के गठबंधन :15 और 21 विधायक क्रमश: को सरकार बनाने का न्यौता दिया था।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2013 में दिल्ली में भी भाजपा ने 31 सीटें जीती थी लेकिन 28 विधायक वाले आप को, जिसके पास कांग्रेस का समर्थन था, सरकार बनाने का निमंत्रण मिला था।

मंत्री ने कहा कि इसी तर्ज पर कई और दृष्टांत जैसे 1952 में :मद्रास:, 1967 :राजस्थान: और 1982 :हरियाणा: उपलब्ध हैं। भाषा


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