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'भाजपा कर्ज माफ नहीं कर रही, किसान कर रहे हैं आत्महत्या'

MAR 20 , 2017
राज्यसभा में कांग्रेस ने आरोप लगाया कि भाजपा की अगुवाई वाली सरकार ने किसानों के कर्ज माफ करने का अपना वादा पूरा नहीं किया जिसकी वजह से महाराष्‍ट्र में 117 किसानों ने और अन्य राज्यों भी में किसानों ने आत्महत्या की।

शून्यकाल में यह मुद्दा उठाते हुए कांग्रेस के प्रमोद तिवारी ने कहा कि महाराष्‍ट्र में इसी साल जनवरी और फरवरी माह में 117 किसानों ने आत्महत्या कर ली है। इनमें से 46 किसानों के परिवारों को मुआवजा दिया गया, 13 के दावे अस्वीकार कर दिए गए और 58 के दावों पर विचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मुआवजा दिए जाने से पता चलता है कि किसानों ने आत्महत्या की है।

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तिवारी ने कहा कि किसानों की आत्महत्या का कारण अकाल, कम बारिश या फसल का कम उत्पादन होना नहीं है। फसल तो बंपर हुई लेकिन नोटबंदी की वजह से उन्हें उनकी फसल का सही मूल्य नहीं मिल पाया।

उन्होंने कहा कि सरकार ने किसानों का कर्ज माफ करने का वादा किया था लेकिन उसे पूरा नहीं किया और किसान घोर आर्थिक संकट में डूब गए। उन्होंने कहा कि सरकर ने वादा किया था कि अगर उत्तर प्रदेश में वह सत्ता में आती है तो मंत्रिमंडल की पहली ही बैठक में किसानों के रिण माफ करने का फैसला किया जाएगा। मंत्रिमंडल की पहली बैठक हो गई और किसानों की रिण माफी के संबंध में कोई घोषणा नहीं की गई।

तिवारी ने कहा कि किसानों की आत्महत्या के लिए वह सीधे सीधे सरकार पर आरोप लगा रहे हैं जिसकी गलत नीतियों के कारण महाराष्‍ट्र में 117 किसानों ने आत्महत्या की। अन्य राज्यों में भी किसान आत्महत्या कर रहे हैं।

कांग्रेस की ही रजनी पाटिल ने हाल ही में महाराष्‍ट्र में हुई ओलावृष्टि से किसानों की फसल खराब होने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि राज्य के किसानों ने पहले तो चार साल अकाल का सामना किया, फिर नोटबंदी के फैसले से वह परेशान हुए और अब उनकी फसल ओलावृष्टि होने की वजह से खराब हो गई।

उन्होंने केंद्र सरकार से किसानों का कर्ज माफ करने की अपील करते हुए कहा कि एक साल में महाराष्‍ट्र में करीब 1000 किसान आत्महत्या कर चुके हैं। अन्य राज्यों में भी किसान आत्महत्या कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि संप्रग सरकार के कार्यकाल में किसानों का 72000 करोड़ रूपये का कर्ज माफ किया गया था।

पाटिल ने यह भी कहा कि किसानों को बेमौसम बारिश की वजह से फसल हानि होने के लिए बीमा संरक्षण भी दिया जाना चाहिए।

इसी पार्टी के सदस्य बीके हरिप्रसाद ने कर्नाटक में सूखे का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि राज्य में उत्तर पूर्वी मानसून पूरी तरह बेअसर रहा जिसकी वजह से फसल की बुवाई नहीं हो पाई और राज्य के 160 तालुका सूखाग्रस्त घोषित किए गए हैं।

उन्होंने कहा कि सूखे की वजह से राज्य में चारा संकट भी उत्पन्न हो गया है। राज्य सरकार की ओर से जो मदद की गई है वह आपदा की विभीषिका को देखते हुए बहुत की छोटी है। केंद्र सरकार को इस ओर तत्काल ध्यान देना चाहिए।

वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के विजय साई रेड्डी ने आंध्रप्रदेश में भीषण सूखे का मुद्दा उठाते हुए कहा कि राज्य में दक्षिण पश्चिमी मानसून और उत्तर पूर्वी मानसून की रूखाई के कारण 30 में से 10 जिले सूखाग्रस्त घोषित किए गए हैं।

रेड्डी ने कहा कि सूखे की वजह से न केवल अन्न संकट और चारा संकट उत्पन्न हो गया है बल्कि लोग रोजगार की तलाश में अन्यत्र पलायन भी कर रहे हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से इस ओर तत्काल ध्यान दिए जाने की मांग की। भाषा

     


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