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अब दिव्यांगों को भी मिलेंगे मनचाहे जीवनसाथी, एप होगी मददगार

MAR 06 , 2017
शारीरिक अक्षमता का सामना कर रहे लोग अब अपने लिए एक सही जीवन साथी ढूंढ सकेंगे। एक नया ऑफलाइन मैचमेकिंग मोबाइल एप्लीकेशन की शुरुआत हो चुकी है जिसके माध्यम से दिव्यांगों को एक ऐसा साथी ढूंढने में मदद मिलेगी जो उनके प्रति सहानुभूति और संवेदना रखे।

डेटिंग एप्लीकेशन टिंडर जैसा एप्लीकेशन इनक्लोव वर्ष 2014 में एक ऑफलाइन मैचमेकिंग (जोड़ी मिलाने वाले) के मंच के रूप में शुरू किया गया था। इनक्लोव के एक सह-संस्थापक शंकर श्रीनिवासन को जब घुटने की चोट के कारण तीन महीने तक घर में बंधकर बैठ जाना पड़ा, तब उन्हें अहसास हुआ कि देश में सार्वजनिक मंचों तक पहुंच कितनी मुश्किल है।

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श्रीनिवासन ने कहा, मेरी सह-संस्थापक कल्याणी खोना जुलाई 2014 में यह विचार लेकर आईं और इसकी शुरूआत एक ऑफलाइन मैचमेकिंग एजेंसी के रूप में हुई, जिसमें लोगों के प्रोफाइल खुद मिलाए जाते थे। उन्होंने कहा, हम दोनों ही जोडि़यों के मिलान को लेकर उत्सुक थे और तब हमने सोचा कि ऐसा कौन सा समुदाय है, जिसे इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है। यह समुदाय (दिव्यांग) ऐसा ही एक समुदाय लगा।

गौरतलब है कि किसी भी अन्य एप्लीकेशन की तरह इसके प्रयोगकर्ता को इसमें नाम, तस्वीर, उम्र, पेशेवर और शैक्षणिक जानकारी आदि डालनी होती है। उन्हें यह भी बताना होता है कि उनमें किस किस्म की विकलांगता या विसंगति है। इससे प्रयोगकर्ताओं को अपनी पसंद का व्यक्ति चुनने में पारदर्शिता रहती है। इस पर प्रोफाइल बनाने वाले को विकलांगता के प्रतिशत, सहायक उपकरण और निर्भरता के स्तर आदि की भी जानकारी देनी होती है।

श्रीनिवासन ने इस मोबाइल एप्लीकेशन के बारे में बताते हुए कहा, आपको रोज पांच नए प्रोफाइल दिखाए जाते हैं और आप बातचीत के लिए चैट रिक्वेस्ट भेज सकते हैं। यह रिक्वेस्ट स्वीकार हो जाने पर दोनों लोग एप्प पर बात कर सकते हैं और अपनी मर्जी से निजी जानकारी साझा कर सकते हैं। उन्होंने कहा, किसी भी तरह की विसंगति से प्रभावित लोग यहां पंजीकरण करवा सकते हैं।

उन्होंने बताया कि इस एप में शारीरिक, मानसिक या बौद्धिक, स्वास्थ्य संबंधी विसंगतियां तो शामिल हैं ही, साथ ही साथ इसमें बिना किसी विकलांगता या स्वास्थ्य संबंधी समस्या वाले लोग भी पंजीकरण करवा सकते हैं। सभी किस्म की अक्षमताओं वाले लोगों के इस्तेमाल के लिए पूरी तरह सुगम इस एप्लीकेशन में कई नए फीचर भी आने बाकी हैं। भाषा


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