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सहारा-बिड़ला डायरी मामले में मोदी को राहत, सुप्रीम कोर्ट में याचिका खारिज

JAN 11 , 2017
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सहारा-बिड़ला डायरी मामले में बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में जांच की मांग करने वाली प्रशांत भूषण की याचिका खारिज कर दी है। भूषण ने अपनी संस्‍था सीपीआईएल की तरफ से यह याचिका दायर की थी मगर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले में पीएम नरेंद्र मोदी और अन्य के खिलाफ जांच कराने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं हैं।

कोर्ट ने कहा कि भूषण द्वारा पेश किए गए कागजात जांच के लिए पर्याप्त नहीं है। पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने भूषण को आरोपों के पक्ष में कुछ पुख्ता सबूत पेश करने के लिए कहा था मगर भूषण ऐसा करने में विफल रहे।

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खास बात यह है कि भूषण द्वारा अदालत में रखे गए इन्हीं दस्तावेजों के सहारे कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने पिछले दिनों पीएम मोदी पर सार्वजनिक आरोप लगाए थे। अब सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद भाजपा को राहुल गांधी पर हमलावर होने का मौका मिल जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने इन दस्तावेजों को शून्य बताते हुए याचिकाकर्ता संगठन को पुख्ता प्रमाण पेश करने के लिए कहा था। याचिकाकर्ता संगठन सीपीआईएल ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर कहा है कि आयकर विभाग की अप्रैजल रिपोर्ट, डायरी और ई-मेल साफ-साफ इशारे करती है कि राजनेताओं को रिश्वत दी गई थी, लिहाजा सुप्रीम कोर्ट को जांच का आदेश देना चाहिए। हलफनामे में यह भी कहा गया है कि यह विरले ही होता है जब अदालत या जांच एजेंसी के समक्ष ऐसे पुख्ता दस्तावेज पेश किए गए हों। ऐसे में अगर इस मामले में जांच का आदेश नहीं दिया जाता तो सुप्रीम कोर्ट द्वारा किसी भी मामले में जांच का आदेश देना न्यायसंगत नहीं होगा।

गौरतलब है कि इनकम टैक्स की एक रेड में सहारा के ऑफिस से एक डायरी मिली थी, जिसमें कथित रूप से यह लिखा है की 2003 में गुजरात के मुख्यमंत्री को 25 करोड़ रुपये घूस दी गई। उस समय नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे। इनके अलावा तीन और मुख्यमंत्रियों को भी घूस दी गई। बता दें कि इस डायरी के बिना पर ही कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने पीएम मोदी पर आरोप लगाए थे। नरेंद्र मोदी समेत अन्य राजनेता को रिश्वत देने का आरोप लगाने वाले एनजीओ ने पिछले गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट से कहा था कि अगर सुप्रीम कोर्ट इस मामले में जांच का आदेश नहीं देता है तो कोई दूसरी जांच न्यायसंगत नहीं होगी।

हलफनामे में कहा गया है कि बिरला समूह पर सीबीआई के छापे और सहारा समूह की कंपनियों पर आयकर विभाग के छापे में अघोषित रकम, डायरी, नोटबुक, ई-मेल समेत कई अन्य दस्तावेज मिले थे। इन दस्तावेजों से साफ है कि इन कंपनियों द्वारा राजनेताओं और नौकरशाहों को रिश्वत दी गई थी।


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